रीवा में न्याय सत्याग्रह में पहुंचे पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने स्वास्थ्य व्यवस्था की बदहाली और आदिवासियों के अधिकारों को लेकर सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने डिप्टी सीएम से इस्तीफे की मांग की।
मध्य प्रदेश के बालाघाट के बैहर-बिरसा क्षेत्र में बच्चों की मौत के दावे पर हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। कोर्ट ने अखबारों के आधार पर PIL दाखिल करने पर नाराजगी जताई।
कोटर में तीन साल से 30 बिस्तरों का अस्पताल अधूरा पड़ा है। पुराने पीएचसी में रखे लाखों के उपकरण बारिश के पानी में डूब गए, जबकि नई स्वास्थ्य सुविधा शुरू होने का इंतजार जारी है।
सतना के परसमनिया प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टर, स्टाफ, जनरेटर और संसाधनों की कमी से ग्रामीण परेशान हैं। बारिश में खराब रास्ता गंभीर मरीजों के लिए जोखिम बढ़ाता है, 85 गांव प्रभावित हैं।
रीवा के संजय गांधी अस्पताल को लेकर मरीजों को निजी अस्पतालों में रेफर किए जाने, सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं पर असर और प्रशासनिक निगरानी को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए। संबंधित आरोपों की आधिकारिक पुष्टि होना शेष है।
नागौद से गंभीर हालत में जिला अस्पताल लाई गई प्रसूता की उपचार के दौरान मौत हो गई। परिजनों ने इलाज में लापरवाही का आरोप लगाया, जबकि अस्पताल प्रबंधन ने समय पर आवश्यक चिकित्सकीय प्रयास किए जाने का दावा किया।
रीवा के सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में ईसीजी रिपोर्ट प्रिंट करने के लिए कागज खत्म हो गया। मरीजों को मोबाइल में फोटो लेकर डॉक्टरों को रिपोर्ट दिखानी पड़ी, जबकि कई ग्रामीण और बुजुर्गों को भारी परेशानी उठानी पड़ी।
सतना जिला अस्पताल की जांच रिपोर्ट में विशेषज्ञ डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ और संसाधनों की कमी स्वीकार की गई। 150 प्रतिशत बेड ऑक्यूपेंसी के कारण मरीज निजी अस्पतालों का रुख करने को मजबूर हो रहे हैं।
सतना जिला अस्पताल में स्वास्थ्य सुविधाओं की पोल खुल गई। मैहर से रेफर गर्भवती महिला को स्ट्रेचर और व्हीलचेयर नहीं मिली, जिससे उसे पैदल लेबर रूम तक जाना पड़ा। वार्ड बॉय की अनुपस्थिति भी उजागर हुई।
सतना में आग से झुलसे मरीजों को बिना एसी वाली 108 एंबुलेंस से रेफर किए जाने के बाद आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर सवाल उठे हैं। एंबुलेंसों के रखरखाव और मॉनिटरिंग की कमी भी सामने आई है।






















